आरिफ की ज़िंदगी आसान नहीं थी। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और पढ़ाई के साथ-साथ उसे पिता के काम में हाथ भी बँटाना पड़ता था। थकान के कारण कई बार वह पढ़ नहीं पाता। परीक्षा में उसके अंक औसत आते। कई लोग कहते, “तुमसे पढ़ाई नहीं हो पाएगी।”
शुरू में आरिफ इन बातों से टूट जाता था। उसे लगता था कि हालात ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी हैं। लेकिन एक दिन उसने अपने स्कूल के नोटिस बोर्ड पर एक वाक्य पढ़ा—
“हालात नहीं, हिम्मत इंसान को बड़ा बनाती है।”

उस दिन आरिफ ने फैसला किया कि चाहे कितनी भी मुश्किल हो, वह हार नहीं मानेगा। उसने समय को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट दिया। काम से लौटने के बाद थोड़ा आराम करता और फिर पढ़ाई में लग जाता। कभी-कभी नींद आती, लेकिन वह खुद को याद दिलाता कि यह मेहनत उसके भविष्य के लिए है।
कई बार वह थककर किताब बंद कर देता, लेकिन अगले दिन फिर कोशिश करता। जब अंक नहीं बढ़े, तब भी उसने पढ़ाई छोड़ी नहीं। शिक्षक उसकी लगन देखकर उसे अतिरिक्त मदद देने लगे।
धीरे-धीरे आरिफ की मेहनत दिखने लगी। उसके उत्तर बेहतर होने लगे। आत्मविश्वास बढ़ा। परीक्षा के दिन उसने शांत मन से पेपर दिया। परिणाम आया तो वह अच्छे अंकों से पास हुआ।
आरिफ मुस्कुराया, क्योंकि उसने खुद को नहीं हराया था।
उसने जाना कि जो हार मान ले, वही सच में हारता है।
सीख: लगातार प्रयास ही सच्ची जीत है।














