रवि की मेहनत और सफलता
रवि एक छोटे से गाँव का बच्चा था। वह पढ़ाई में बहुत कमजोर था और अक्सर अपने दोस्तों से पीछे रहता। उसके अंक औसत आते और कई बार वह फेल होने के कगार पर भी पहुंचता। उसके माता-पिता मेहनती थे, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। रवि का मन पढ़ाई में कम ही लगता था। उसे अक्सर लगता कि “शायद मैं कभी टॉप नहीं कर पाऊँगा।” उसके दोस्त भी उससे मज़ाक उड़ाते और कहते, “इतनी कोशिश करने से भी क्या होगा?”

एक दिन उसके शिक्षक ने कक्षा में कहा, “मेहनत से बड़ी कोई ताकत नहीं है। अगर तुम रोज़ थोड़ी मेहनत करोगे तो सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी।” ये बात रवि के दिल में उतर गई। उसने तय किया कि अब वह आलस छोड़ देगा और पढ़ाई में ध्यान देगा। रवि ने रोज़ सुबह जल्दी उठने का नियम बनाया और पढ़ाई का समय तय किया। गणित और अंग्रेज़ी के कठिन विषयों पर विशेष ध्यान दिया।
आरंभ में उसे बहुत कठिनाई हुई। वह बार-बार गलतियाँ करता और कभी-कभी हतोत्साहित भी हो जाता। लेकिन उसने हार नहीं मानी। जब भी कुछ समझ नहीं आता, वह शिक्षक से सवाल पूछता। उसने दिन का दोहराव करना शुरू किया और रोज़ अभ्यास जारी रखा। धीरे-धीरे उसकी समझ बढ़ी और वह आत्मविश्वासी बन गया।

परीक्षा का समय आया। रवि ने पूरे ध्यान और मेहनत से उत्तर दिए। परिणाम घोषित हुआ और रवि पास हो गया। उसके माता-पिता बेहद खुश हुए और शिक्षक ने उसकी सराहना की। रवि ने महसूस किया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है और आत्मविश्वास से कठिनाई भी आसान हो जाती है।
अब रवि ने लक्ष्य तय किया है कि वह और अधिक मेहनत करेगा और अगली बार कक्षा में टॉप करेगा। उसने जाना कि सफलता की सीढ़ियाँ धीरे-धीरे चढ़ी जाती हैं और हर कदम पर कोशिश और धैर्य जरूरी है। रवि की कहानी हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियाँ कभी भी हमें रोक नहीं सकतीं, अगर हम खुद पर विश्वास रखें और लगातार प्रयास करें।
सीख: मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से हर छात्र सफलता पा सकता है।













